Hindi - Unseen Pessage 1 ( अपठित गद्यांश और पद्यांश )

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निर्देश (प्र. सं.61-66 ) निचे दिए गधांश को पढ़कर पूछे प्रशनो के उचित उत्तर वाले विकल्प चुनिए

संस्कृति और सभ्यता — ये दो शब्द है और उनके अर्थ भी अलग अलग है सभ्यता मनुष्य का गुण है जिससे वह अपनी बाहरी तरक्की करता है संस्कृति वह गुण है जिससे वह अपनी भीतरी उन्नति करता है , करुणा , प्रेम और परोपकार सीखता है आज रेलगाड़ी मोटर और हवाई जहाज , लम्बी – चौड़ी सड़कें और बड़े बड़े मकान, अच्छा भोजन और अच्छी पोशाक, ये सभ्यता की पहचान है और जिस देश में इनकी जितनी ही अधिकता है उस देश को हम उतना ही सभ्य मानते है मगर संस्कृति उन सबसे कहीं बारीक़ चीज़ है
वह मोटर नहीं , मोटर बनाने की कला है , मकान नहीं , मकान बनाने की रूचि है संस्कृति धन नहीं , गुण है संस्कृति ठाठ – बाट नहीं , विनय और विनम्रता है यह कहावत है कि सभ्यता वह चीज़ है जो हमारे पास है लेकिन संस्कृति वह गुण है जो हमसे छिपा हुआ है हमारे पास घर होता है कपड़े- लत्ते होते है मगर ये सारी चीज़े हमारी सभ्यता के सबूत है जबकि संस्कृति इतने मोटे तौर पर दिखलाई नहीं देती, वह बहुत ही सूक्ष्म और महान चीज़ है और वह हमारी हर पसंद , हर आदत में छिपी रहती है मकान बनाना सभ्यता का काम है , लेकिन हम मकान का कौन सा नक्शा पसंद करते है – यह हमारी संस्कृति बताती है आदमी के भीतर काम, क्रोध, लोभ, मद, मोह, और मतसर ये छ: विकार प्रकृति के दिए हुए है मगर ये विकार अगर बेरोक छोड़ दिए जाए , तो आदमी इतना गिर जाए की उसमे और जानवर में कोई भेद न रह जाए इसलिए आदमी इन विकारों पर रोक लगाता है इन दुर्गुणों पर आदमी जितना ज्यादा काबू क्र पता है उसकी संस्कृति भी उतनी ही ऊँची समझी जाती है संस्कृति का स्वभाव है कि वह आदान – प्रदान से बढ़ती है जब दो देशो या जातियों के लोग आपस में मिलते है तब उन दोनों की संस्कृतियाँ एक- दूसरे को प्रभावित करती है , इसलिए संस्कृति की द्रष्टि में वह जाती या देश बहुत धनी समझा जाता है जिसने ज्यादा से ज्यादा देशो या जातियों की संस्कृतियों का लाभ उठाकर अपनी संस्कृति का विकास किया हो

6. सभ्यता का अभिप्राय है

  • Option : B
  • Explanation : प्रस्तुत गद्यांश के अनुसार सभ्यता का अभिप्राय मानव के भौतिक विकास के विधायक गुण से है
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निर्देश (प्र. सं. 66-71 ) निचे दिए गधांश को पढ़कर पूछे प्रशनो के उचित उत्तर वाले विकल्प चुनिए

मन मोहनी प्रकृति की गोद में जो बसा है
सुख- स्वर्ग सा जहाँ है वह देश कौन सा है
जिसका चरण निरंतर रत्नेश धो रहा है
जिसका मुकुट हिमलाय वह देश कौन सा है
नदियाँ जहाँ सुधा की धारा बहा रही है
सींचा हुआ सलोना वह देश कौन सा है
जिसके बड़े रसीले फल कन्द नाज मेवे
सब अंग में सजे है वह देश कौन सा है
जिसमें सुगंध वाले सुन्दर प्रसून प्यारे
दिन रात हँस रहे है वह देश कौन सा है

7. मुकुटरुपी क्या है

  • Option : C
  • Explanation : प्रस्तुत काव्यांश में 'मुकुट- रूपी ' हिमालय को कहा गया है
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8. यह कविता है

  • Option : D
  • Explanation : प्रस्तुत कविता देशभक्ति से सम्बंधित है
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9. यहाँ ' सब अंग में सजे है ' का आशय है

  • Option : C
  • Explanation : प्रस्तुत काव्यांश में 'सब अंग में सजे है ' का आशय है - देश के प्रत्येक भू- भाग में सजे है
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10. दिन- रात कौन हँस रहे है ?

  • Option : C
  • Explanation : प्रस्तुत काव्यांश के अनुसार दिन रात प्यारे , सुन्दर सुगन्धित पुष्प हँस रहे है
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